Crude Oil Price: कच्चे तेल में तेज उछाल, ब्रेंट $90 के करीब; होर्मुज संकट से बाजार में बढ़ी चिंता

 
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Crude Oil Price Today 11 August 2026: अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में एक बार फिर तेजी का माहौल बन गया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन मजबूती देखने को मिली और मंगलवार, 11 अगस्त को एशियाई कारोबार के शुरुआती घंटों में भी खरीदारी का रुझान बरकरार रहा। ब्रेंट क्रूड अब 90 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर के करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है।

तेल बाजार में इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव बड़ी वजह माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने नई और सख्त मांगें रखे जाने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के समझौते की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर नजर आ रहा है।

ब्रेंट और WTI में करीब 5% की तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात के कारोबार के दौरान लगभग 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

मंगलवार सुबह WTI क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद अब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ रहा है।

क्रूड की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब ट्रेडर्स की नजर ईरान, अमेरिका और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर बनी हुई है।

ट्रंप की नई शर्तों से क्यों बढ़ी अनिश्चितता?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने कुछ नई मांगें रखी हैं। साथ ही उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि भविष्य में होने वाली बातचीत के दौरान इन शर्तों को मजबूती से उठाया जाए।

ट्रंप ने यह भी कहा कि पहले हुई बैठकों में मुआवजे से जुड़ा विषय सामने नहीं आया था। हालांकि ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का जिक्र उस 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) में बताया गया है, जिस पर जून में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर हुए थे।

नई शर्तों के सामने आने से बाजार में यह आशंका मजबूत हुई है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने में अधिक समय लग सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों टिकी दुनिया की नजर?

Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी तरह की रुकावट या तनाव पैदा होने पर तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।

यही कारण है कि यहां होने वाले राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव पर तेजी से असर डाल सकते हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के मुताबिक, ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के भविष्य के प्रबंधन को लेकर द्विपक्षीय स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

हालांकि ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता आसान नहीं होगा।

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटी

इस समुद्री मार्ग पर ट्रैफिक की मौजूदा स्थिति भी बाजार की चिंता बढ़ा रही है।

एनर्जी एस्पेक्ट्स की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में बताया कि फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं।

यह संख्या पहले के मुकाबले काफी कम है। जून में MoU के बाद जहाजों का दैनिक औसत करीब 14 तक पहुंच गया था। मौजूदा कम ट्रैफिक से संकेत मिलता है कि इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग पर गतिविधियां अभी सामान्य स्तर तक नहीं लौटी हैं।

ग्लोबल ऑयल इन्वेंट्री पर भी दबाव

तेल बाजार के लिए केवल समुद्री मार्ग की स्थिति ही चिंता का कारण नहीं है। वैश्विक स्तर पर इन्वेंट्री में कमी की स्थिति भी कीमतों को समर्थन दे सकती है।

TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक का मानना है कि जलडमरूमध्य बंद रहने, ग्लोबल इन्वेंट्री में बड़ी गिरावट और तेल प्रवाह सामान्य स्तर से नीचे रहने की स्थिति में शॉर्ट कवरिंग तेज हो सकती है।

शॉर्ट कवरिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब कीमतों में गिरावट की उम्मीद में पोजीशन बनाने वाले ट्रेडर्स बाजार की दिशा बदलने पर अपनी पोजीशन बंद करने के लिए खरीदारी करते हैं। ऐसी खरीदारी तेजी को और मजबूत कर सकती है।

मेलेक के आकलन के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड मौजूदा भाव से 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल ऊपर तक कारोबार कर सकता है। हालांकि वास्तविक कीमतें भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेंगी।

ब्रेंट के $90 पहुंचने का भारत पर क्या हो सकता है असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली तेजी देश की आयात लागत के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

महंगा कच्चा तेल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी आयात खर्च तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। भारत में खुदरा ईंधन की कीमतों पर टैक्स, रिफाइनिंग लागत, मुद्रा विनिमय दर और तेल कंपनियों से जुड़े दूसरे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।

अब बाजार की नजर किन घटनाक्रमों पर रहेगी?

आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की दिशा काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर कर सकती है।

अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही सामान्य होने की दिशा में प्रगति होती है तो सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हो सकती है। इसके विपरीत तनाव बढ़ने या समझौते में और देरी होने पर क्रूड की कीमतों में अस्थिरता जारी रह सकती है।

फिलहाल ब्रेंट का 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर अब इस बात पर रहेगी कि मौजूदा तेजी आगे जारी रहती है या किसी कूटनीतिक पहल के बाद कीमतों पर दबाव बनता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बाजार जानकारी और दिए गए आंकड़ों पर आधारित है। कमोडिटी बाजार में कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग से जुड़ा फैसला लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

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