Crude Oil Price: कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद से ब्रेंट $80 से नीचे फिसला
Crude Oil Price: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज गिरावट देखने को मिली। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने और फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड 5% से अधिक टूटकर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई फिर से सुचारु होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
क्यों आई कच्चे तेल में इतनी बड़ी गिरावट?
बीते कुछ दिनों से मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। हालिया संकेतों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है। वहीं कतर की ओर से भी यह जानकारी सामने आई कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसी उम्मीद ने निवेशकों की चिंता कम की और बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर बना दबाव जल्द कम हो सकता है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया।
ब्रेंट और WTI क्रूड का ताजा भाव
ताजा कारोबार में प्रमुख बेंचमार्क की कीमतें इस प्रकार रहीं:
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ब्रेंट क्रूड: लगभग 79.14 डॉलर प्रति बैरल
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WTI क्रूड: करीब 75.06 डॉलर प्रति बैरल
गौरतलब है कि इससे पहले भी लगातार दो कारोबारी सत्रों में दोनों बेंचमार्क में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी थी।
पिछले दो हफ्तों में क्यों बदला बाजार का रुख?
हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी असर बाजार पर पड़ा, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टालने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसके बाद निवेशकों को उम्मीद जगी कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यदि कोई अस्थायी समझौता हो भी जाता है, तब भी यह जरूरी नहीं कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय तनाव का स्थायी समाधान निकल आए। इसलिए बाजार अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।
यदि इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। वहीं मार्ग खुलने या सप्लाई सामान्य होने की संभावना बनने पर बाजार में राहत आती है और कीमतों में गिरावट दर्ज होती है।
कूटनीतिक प्रयासों ने बढ़ाई उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
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कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं।
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ईरान कथित तौर पर होर्मुज क्षेत्र से बारूदी सुरंगें हटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
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ओमान की मध्यस्थता में सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर भी बातचीत जारी है।
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दूसरी ओर, सऊदी अरब भी क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय बताया जा रहा है।
इन घटनाक्रमों ने बाजार में यह उम्मीद पैदा की है कि आने वाले दिनों में तेल आपूर्ति पहले की तरह सामान्य हो सकती है।
अमेरिकी भंडार बढ़ने से भी बना दबाव
कच्चे तेल की कीमतों पर एक और कारण से दबाव देखने को मिला। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में लगभग 2.7 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी हुई। वहीं ओक्लाहोमा के कुशिंग स्टोरेज हब में भी भंडार बढ़ने की खबर सामने आई।
यदि आधिकारिक आंकड़े भी इस बढ़ोतरी की पुष्टि करते हैं, तो यह संकेत होगा कि बाजार में फिलहाल तेल की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
आगे क्या रहेगा बाजार का फोकस?
अब निवेशकों की नजरें मध्य पूर्व में जारी कूटनीतिक बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, अमेरिकी सरकारी इन्वेंट्री डेटा और वैश्विक मांग के संकेतों पर रहेंगी। यदि क्षेत्र में तनाव और कम होता है तथा सप्लाई सामान्य बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। वहीं किसी नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव लौट सकता है।
अस्वीकरण: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार लगातार बदलती रहती हैं। निवेश या ट्रेडिंग से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
