Credit Card Without Bank Account: क्या बिना खाता खोले मिल सकता है क्रेडिट कार्ड? जानें नियम और आवेदन का तरीका

 
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क्रेडिट कार्ड आज केवल खरीदारी का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह इमरजेंसी खर्च, ऑनलाइन पेमेंट, ट्रैवल बुकिंग और कई तरह के डिजिटल लेनदेन में भी काम आता है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या किसी बैंक से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए उसी बैंक में सेविंग या करंट अकाउंट होना जरूरी है।

इसका जवाब है—हर मामले में नहीं। कई बैंक ऐसे ग्राहकों को भी क्रेडिट कार्ड जारी कर सकते हैं जिनका उस बैंक में पहले से कोई बैंक अकाउंट नहीं है। क्रेडिट कार्ड जारी करने का फैसला आमतौर पर आवेदक की आय, रोजगार की स्थिति, क्रेडिट हिस्ट्री, क्रेडिट स्कोर और भुगतान क्षमता जैसी बातों को देखकर किया जाता है।

अगर बैंक को लगता है कि आवेदक समय पर क्रेडिट कार्ड बिल चुका सकता है और उसकी वित्तीय प्रोफाइल निर्धारित शर्तों को पूरा करती है, तो बैंक अकाउंट न होने के बावजूद कार्ड मिलने की संभावना हो सकती है।

क्या उसी बैंक में अकाउंट होना जरूरी है?

किसी बैंक का क्रेडिट कार्ड लेने के लिए हमेशा उस बैंक का मौजूदा ग्राहक होना अनिवार्य नहीं होता। कई बैंक और कार्ड जारी करने वाली संस्थाएं ऐसे आवेदकों से भी आवेदन स्वीकार करती हैं जिनका उनके यहां सेविंग अकाउंट नहीं है।

ऐसे मामलों में बैंक ग्राहक की वित्तीय स्थिति का आकलन करता है। इसमें उसकी नियमित आय, नौकरी या व्यवसाय, मौजूदा कर्ज, पिछले लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान रिकॉर्ड और क्रेडिट स्कोर जैसी जानकारियां देखी जा सकती हैं।

अगर आवेदक बैंक की पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो उसे क्रेडिट कार्ड जारी किया जा सकता है।

क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है तो क्या होगा?

कई लोगों के सामने दूसरी समस्या यह होती है कि उन्होंने पहले कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया होता। ऐसे में उनकी क्रेडिट हिस्ट्री बहुत सीमित या बिल्कुल नहीं हो सकती है।

ऐसे ग्राहकों के लिए FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले मिलने वाला सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड एक विकल्प हो सकता है। कुछ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट को सुरक्षा के रूप में रखकर उसके आधार पर क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं।

इस तरह के कार्ड में बैंक का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है, क्योंकि ग्राहक की FD उसके पास सुरक्षा के तौर पर मौजूद रहती है। वहीं ग्राहक नियमित और जिम्मेदारी से कार्ड का इस्तेमाल करके अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने की शुरुआत कर सकता है।

क्रेडिट कार्ड के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?

क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय बैंक KYC और आय से जुड़े दस्तावेज मांग सकता है। हालांकि दस्तावेजों की सही सूची बैंक और कार्ड के प्रकार के हिसाब से अलग हो सकती है।

आमतौर पर आधार कार्ड जैसे पहचान दस्तावेज, पैन कार्ड, पते का प्रमाण और आय का प्रमाण मांगा जा सकता है। नौकरीपेशा लोगों से सैलरी स्लिप या दूसरे इनकम डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं, जबकि स्वरोजगार या व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए अलग दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।

बैंक आवेदन की जांच करने के बाद ही यह तय करता है कि कार्ड जारी किया जाएगा या नहीं और उसकी क्रेडिट लिमिट कितनी होगी।

बिना बैंक अकाउंट के क्रेडिट कार्ड के लिए कैसे करें आवेदन?

सबसे पहले उस बैंक या कार्ड जारीकर्ता का क्रेडिट कार्ड चुनें जिसकी पात्रता शर्तें आपकी प्रोफाइल से मेल खाती हों। इसके बाद ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।

आवेदन के दौरान व्यक्तिगत जानकारी, रोजगार या व्यवसाय की जानकारी और आय से जुड़े विवरण भरने होते हैं। इसके साथ जरूरी KYC दस्तावेज जमा किए जाते हैं।

बैंक इसके बाद आवेदक की पात्रता और क्रेडिट प्रोफाइल की जांच करता है। सभी शर्तें पूरी होने पर क्रेडिट कार्ड जारी किया जा सकता है। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि आवेदन करने भर से कार्ड मिलना सुनिश्चित नहीं होता।

FD के बदले क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है?

अगर किसी व्यक्ति की नियमित आय का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या उसकी क्रेडिट हिस्ट्री नई है, तो FD-backed credit card उपयोगी विकल्प हो सकता है।

इसमें ग्राहक बैंक में एक निश्चित रकम की फिक्स्ड डिपॉजिट करता है और बैंक उसी के आधार पर क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा सकता है। कार्ड की क्रेडिट लिमिट आमतौर पर बैंक की नीति और FD की राशि के आधार पर तय होती है।

समय पर पूरा बिल चुकाने और कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने से भविष्य में बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल बनाने में मदद मिल सकती है।

क्या प्रीपेड कार्ड भी क्रेडिट कार्ड जैसा होता है?

क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड को एक जैसा समझना सही नहीं है। दोनों का काम करने का तरीका अलग है।

प्रीपेड कार्ड में उपयोगकर्ता पहले अपना पैसा जमा या लोड करता है। इसके बाद वह केवल उतनी ही रकम खर्च कर सकता है जितनी राशि कार्ड में उपलब्ध है।

इसके उलट क्रेडिट कार्ड में कार्ड जारीकर्ता ग्राहक को एक निर्धारित क्रेडिट लिमिट देता है। ग्राहक उस लिमिट के भीतर खर्च करता है और बाद में बिल का भुगतान करता है।

इसी वजह से प्रीपेड कार्ड को क्रेडिट कार्ड का सीधा विकल्प नहीं माना जाता।

क्रेडिट स्कोर पर क्या पड़ता है असर?

क्रेडिट कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह क्रेडिट हिस्ट्री बनाने या बेहतर करने में मदद कर सकता है। समय पर बिल चुकाना और बकाया भुगतान में देरी न करना महत्वपूर्ण होता है।

वहीं प्रीपेड कार्ड में ग्राहक अपना ही पैसा खर्च करता है, इसलिए सामान्य तौर पर उसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड की तरह क्रेडिट हिस्ट्री बनाने का काम नहीं करता।

कार्ड लेने से पहले इन शुल्कों की जानकारी जरूर लें

केवल यह देखकर क्रेडिट कार्ड नहीं लेना चाहिए कि उसमें बड़ी क्रेडिट लिमिट या आकर्षक ऑफर मिल रहा है। आवेदन से पहले कार्ड से जुड़े सभी प्रमुख शुल्क और शर्तों को समझना जरूरी है।

खास तौर पर सालाना फीस, जॉइनिंग फीस, बकाया राशि पर ब्याज, लेट पेमेंट चार्ज, कैश निकासी शुल्क और अन्य लागू शुल्कों की जानकारी जरूर लें।

साथ ही उतना ही खर्च करना बेहतर है जितना तय समय पर आसानी से चुकाया जा सके। केवल न्यूनतम राशि का भुगतान करते रहने पर बाकी बकाया पर ब्याज लग सकता है और कर्ज तेजी से बढ़ सकता है।

बिना बैंक अकाउंट के भी मिल सकता है क्रेडिट कार्ड

कुल मिलाकर, क्रेडिट कार्ड लेने के लिए हर स्थिति में उसी बैंक का अकाउंट होना जरूरी नहीं है। अगर आपकी आय, क्रेडिट प्रोफाइल और अन्य पात्रता शर्तें बैंक के नियमों के अनुरूप हैं तो आप बिना मौजूदा बैंक अकाउंट के भी क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अगर क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है तो FD-backed secured credit card एक विकल्प हो सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी संबंधित बैंक या कार्ड जारीकर्ता की नीति पर निर्भर करेगी। इसलिए आवेदन करने से पहले पात्रता, ब्याज दर और सभी शुल्कों की शर्तें ध्यान से पढ़ लेना बेहतर है।

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