Car Parking Tips- एयरपोर्ट पर कार पार्किंग करना हुआ महंगा, जेब पर पड़ेगा भारी असर
दोस्तो आपने देखा होगा कि जब आप किसी को एयरपोर्ट पर लेने या छोड़ने जाते हैं, तो पार्किंग का खर्च कई बार उम्मीद से कहीं ज्यादा हो सकता है। अगर आपको एयरपोर्ट पर 30 मिनट से ज्यादा रुकना पड़े या आप अपनी कार को कुछ घंटों के लिए पार्क करते हैं, तो कुछ ही समय में सैकड़ों रुपये का बिल बन सकता है। लेकिन सोचने की बात ये हैं कि एयरपोर्ट की पार्किंग इतनी मंहगी क्यों होती हैं, आइए जानें

दिल्ली एयरपोर्ट पर कितनी है पार्किंग फीस?
दिल्ली एयरपोर्ट पर प्राइवेट कार के लिए पार्किंग शुल्क समय के हिसाब से अलग-अलग है।
30 मिनट तक: ₹160
30 मिनट से 1 घंटे तक: ₹250
1 से 2 घंटे: ₹320
4 से 24 घंटे: ₹600
यानी अगर किसी व्यक्ति को एयरपोर्ट पर थोड़ी देर भी ज्यादा रुकना पड़ जाए, तो पार्किंग शुल्क तेजी से बढ़ सकता है।
मुंबई एयरपोर्ट पर पार्किंग चार्ज
मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी पार्किंग शुल्क समय और टर्मिनल के अनुसार अलग है।
टर्मिनल 1
30 मिनट से 1 घंटे: ₹230
4 से 24 घंटे: ₹600
टर्मिनल 2
30 मिनट से 1 घंटे: ₹250
4 से 24 घंटे: ₹600
प्रीमियम पार्किंग, 4 से 24 घंटे: ₹900
इससे साफ है कि एयरपोर्ट पर लंबे समय तक कार खड़ी करना काफी महंगा पड़ सकता है।

एयरपोर्ट पर पार्किंग इतनी महंगी क्यों होती है?
एयरपोर्ट की पार्किंग को सामान्य शहर की पार्किंग की तरह नहीं देखा जाता। एयरपोर्ट परिसर में जमीन की उपलब्धता सीमित होती है और यहां सुरक्षा तथा संचालन की कई अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं।
पार्किंग शुल्क में केवल कार खड़ी करने की जगह का किराया शामिल नहीं होता। इसके पीछे कई तरह के खर्च होते हैं।
पार्किंग शुल्क में किन चीजों का खर्च शामिल होता है?
एयरपोर्ट पार्किंग फीस में आमतौर पर कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं की लागत शामिल होती है, जैसे:
पार्किंग के लिए जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर
सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था
CCTV कैमरे और सर्विलांस सिस्टम
पार्किंग मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी
पर्याप्त लाइटिंग
सफाई और सैनिटेशन
पार्किंग कर्मचारियों की सैलरी
24 घंटे संचालन
फायर और सेफ्टी सिस्टम
एयरपोर्ट के अंदर ट्रैफिक मैनेजमेंट
टर्मिनल तक पहुंच से जुड़ी व्यवस्थाएं
यही वजह है कि एयरपोर्ट की पार्किंग फीस सामान्य बाजार या मॉल की पार्किंग से काफी अलग हो सकती है।
हर एयरपोर्ट की पार्किंग फीस अलग क्यों होती है?
देश के सभी एयरपोर्ट पर पार्किंग शुल्क एक जैसा नहीं होता। दरें तय करते समय कई चीजों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे:
एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या
उपलब्ध पार्किंग स्पेस
जमीन और निर्माण की लागत
पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर
सुरक्षा और संचालन का खर्च
पार्किंग मैनेजमेंट कंपनी के साथ हुआ समझौता
एयरपोर्ट की अन्य परिचालन लागत
इसलिए बड़े और व्यस्त एयरपोर्ट पर पार्किंग शुल्क अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
एयरपोर्ट की कमाई का भी एक हिस्सा है पार्किंग
एयरपोर्ट पार्किंग को आमतौर पर नॉन-एयरोनॉटिकल सर्विस माना जाता है। इसका मतलब है कि यह एयरपोर्ट की ऐसी आय का हिस्सा है जो सीधे फ्लाइट ऑपरेशन से संबंधित नहीं होती।
अगर पार्किंग का कॉन्ट्रैक्ट किसी दूसरी कंपनी को दिया गया है, तो एयरपोर्ट को अलग-अलग मॉडल के तहत आय मिल सकती है। इसमें फिक्स्ड लाइसेंस फीस, न्यूनतम गारंटी, रेवेन्यू शेयर या इनका मिश्रित मॉडल शामिल हो सकता है।
