Car Loan Tips- कार लोन लेते समय इन बातों का रखें ध्यान, वरना नई गाड़ी भी पड़ सकती हैं महंगी

 
Car Loan Tips – Keep these points in mind when taking out a car loan; otherwise, even a new car could end up costing you dearly.

दोस्तो अपने लिए कार खरीदना जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा करना जैसा हैं, लेकिन लोग नई कार लेते समय लोन की EMI पर ज्यादा ध्यान देते हैं, डीलर अगर कम मासिक किस्त बताता है तो खरीदार को लगता है कि कार बजट में आ जाएगी। लेकिन सिर्फ कम EMI देखकर कार लोन लेना महंगा साबित हो सकता है। लंबी लोन अवधि, ज्यादा ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क मिलकर कार की वास्तविक लागत काफी बढ़ा सकते हैं, इसलिए कार लेते समय इन बातों का रखें ध्यान-

Car Loan Tips – Keep these points in mind when taking out a car loan; otherwise, even a new car could end up costing you dearly.

1. सिर्फ EMI देखकर कार लोन लेना सबसे बड़ी गलती

₹15,000 की EMI सुनने में आसान लग सकती है, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि यह EMI कितने वर्षों तक चुकानी होगी।

3 साल की जगह 5 या 7 साल का लोन लेने पर EMI कम हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज काफी बढ़ सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले यह जरूर देखें:

हर महीने कितनी EMI देनी होगी?

लोन की कुल अवधि कितनी है?

कुल कितना ब्याज देना होगा?

लोन खत्म होने तक बैंक को कुल कितनी रकम चुकानी होगी?

याद रखें: कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता।

2. डीलर का पहला लोन ऑफर तुरंत स्वीकार न करें

कार डीलर अक्सर कई बैंकों और NBFCs के साथ काम करते हैं। सुविधा के कारण ग्राहक डीलर द्वारा बताए गए पहले बैंक का लोन ले लेते हैं।

लेकिन अलग-अलग lenders में ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क अलग हो सकते हैं। इसलिए कम से कम 2-3 लोन ऑफर्स की तुलना करें।

कभी-कभी ब्याज दर में सिर्फ 0.5% से 1% का अंतर भी लंबे कार्यकाल में हजारों रुपये की बचत करा सकता है।

3. बहुत कम डाउन पेमेंट भी नुकसानदायक हो सकता है

कम डाउन पेमेंट करने पर शुरुआत में जेब पर कम बोझ पड़ता है, लेकिन इससे लोन की रकम बढ़ जाती है।

Car Loan Tips – Keep these points in mind when taking out a car loan; otherwise, even a new car could end up costing you dearly.

ज्यादा लोन = ज्यादा ब्याज = ज्यादा कुल लागत।

हालांकि, डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपनी पूरी बचत या इमरजेंसी फंड खत्म करना भी सही फैसला नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि ऐसा डाउन पेमेंट चुनें जिससे लोन manageable रहे और आपके पास पर्याप्त बचत भी सुरक्षित रहे।

4. सिर्फ ब्याज दर नहीं, सभी चार्ज देखें

लोन की वास्तविक लागत केवल interest rate से तय नहीं होती। आवेदन करने से पहले इन शुल्कों की जानकारी जरूर लें:

Processing Fee

Documentation Charges

अन्य प्रशासनिक शुल्क

Insurance से जुड़े खर्च

Late Payment Charges

Part-prepayment Charges

Foreclosure Charges

लोन के दस्तावेजों में मौजूद छोटे-छोटे शुल्क भी कुल भुगतान को बढ़ा सकते हैं।

5. Prepayment और Foreclosure की शर्तें पहले समझें

कुछ समय बाद आपकी आय बढ़ सकती है या आपको बोनस अथवा अन्य अतिरिक्त रकम मिल सकती है। ऐसे में आप लोन जल्दी खत्म करना चाह सकते हैं।

इसलिए लोन लेने से पहले यह पता करें कि:

क्या Part-prepayment की सुविधा है?

क्या इसके लिए कोई शुल्क लिया जाएगा?

Foreclosure पर कितना चार्ज लगेगा?

Fixed और Floating Rate लोन के लिए नियम क्या हैं?

इन शर्तों को पहले समझ लेने से भविष्य में अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।

6. कार की कुल लागत सिर्फ EMI और कीमत नहीं है

कार खरीदने के बाद भी लगातार खर्च होते हैं। इसलिए बजट बनाते समय केवल On-road Price और EMI को शामिल करना पर्याप्त नहीं है।

कार की वास्तविक लागत में ये खर्च भी शामिल हो सकते हैं:

Insurance

Fuel

Regular Servicing

Maintenance

Tyres और अन्य consumables

Unexpected Repairs

Parking और अन्य संबंधित खर्च

अगर EMI आपकी मासिक आय का बहुत बड़ा हिस्सा खा रही है, तो रोजमर्रा के खर्च, बचत और निवेश प्रभावित हो सकते हैं।

7. RBI का KFS क्या है?

Key Facts Statement (KFS) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसमें ग्राहक को लोन की प्रमुख वित्तीय जानकारी एक जगह स्पष्ट रूप से दी जाती है।

इसमें आम तौर पर लोन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे:

Loan Amount

Interest Rate

Annual Percentage Rate (APR)

Total Interest

Processing Fees

अन्य applicable charges

Late Payment Charges

Prepayment/Foreclosure से जुड़ी शर्तें

जैसी जानकारी शामिल होती है।

KFS का उद्देश्य ग्राहक को लोन की वास्तविक लागत और महत्वपूर्ण शर्तों को समझने में मदद करना है।

8. KFS

KFS से आपको लोन की लागत समझने में मदद मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको पहला ऑफर स्वीकार कर लेना चाहिए।

अलग-अलग बैंकों और NBFCs के KFS की तुलना करें और देखें कि किस विकल्प में:

कुल ब्याज कम है

APR बेहतर है

शुल्क कम हैं

प्रीपेमेंट की शर्तें सुविधाजनक हैं

लोन की अवधि आपकी आर्थिक स्थिति के अनुकूल है

9. कार लोन लेने से पहले ये सवाल जरूर पूछें

लोन फाइनल करने से पहले बैंक या lender से लिखित रूप में पूछें:

लोन की कुल रकम कितनी है?

ब्याज दर कितनी है?

APR कितना है?

कुल ब्याज कितना देना होगा?

Processing और अन्य शुल्क कितने हैं?

Late payment पर क्या चार्ज लगेगा?

Part-prepayment की अनुमति है या नहीं?

Foreclosure पर कोई शुल्क लगेगा या नहीं?

लोन की कुल अवधि कितनी है?

पूरी अवधि में बैंक को कुल कितनी रकम चुकानी होगी?