8th Pay Commission: कर्मचारियों की इन 5 मांगों पर बढ़ी चर्चा, फिटमेंट फैक्टर से लेकर रिटायरमेंट उम्र तक जानें अपडेट
8th Pay Commission Latest Update: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच हलचल तेज होती जा रही है। आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा कर रहा है। वेतन संरचना, प्रमोशन, भत्ते, रिटायरमेंट से जुड़े नियम और मेडिकल सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अलग-अलग संगठनों की ओर से सुझाव दिए जा रहे हैं।
8वां केंद्रीय वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से गठित किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीने के भीतर सरकार को सौंपनी हैं। इस समय आयोग विभिन्न शहरों में कर्मचारी संगठनों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। दिल्ली में 7 और 10 अगस्त 2026 को भी ऐसी बैठकों का कार्यक्रम रखा गया था।
कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों पर जारी है चर्चा
वेतन आयोग का काम केवल बेसिक सैलरी बढ़ाने तक सीमित नहीं होता। आयोग वेतन संरचना, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े कई पहलुओं का अध्ययन करता है।
इसी प्रक्रिया के तहत विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं। इनमें केंद्रीय सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी सामने आई हैं।
हालांकि इन मांगों को आयोग की मंजूरी या सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। ये फिलहाल कर्मचारी संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों की ओर से दिए जा रहे सुझाव हैं, जिन पर आयोग आगे विचार कर सकता है।
पहली मांग: रिटायरमेंट उम्र 65 साल करने की मांग
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का मुद्दा शामिल है।
प्रतिनिधियों की ओर से यह सुझाव दिया गया है कि केंद्रीय सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जानी चाहिए।
अगर भविष्य में इस तरह का कोई बदलाव स्वीकार किया जाता है तो इसका असर न केवल मौजूदा शिक्षकों की सेवा अवधि पर पड़ेगा, बल्कि नई भर्तियों और पदों की उपलब्धता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल इस मांग पर सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
दूसरी मांग: प्रिंसिपल पदों में प्रमोशन का कोटा बढ़े
शिक्षकों की दूसरी महत्वपूर्ण मांग प्रमोशन व्यवस्था से जुड़ी है।
प्रतिनिधिमंडलों की ओर से मांग की गई है कि स्कूलों में प्रिंसिपल के पदों का एक बड़ा हिस्सा विभागीय शिक्षकों को प्रमोशन के जरिए दिया जाए।
प्रस्ताव के मुताबिक, करीब 50 प्रतिशत प्रिंसिपल पदों को विभागीय प्रमोशन के लिए निर्धारित करने की मांग रखी गई है।
इसका उद्देश्य अनुभवी शिक्षकों के लिए करियर में आगे बढ़ने के अधिक अवसर उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
तीसरी मांग: हर विषय के लिए नया प्रमोशनल पद
शिक्षक संगठनों की एक और मांग अलग-अलग विषयों के लिए वरिष्ठ प्रमोशनल पद बनाने से संबंधित है।
प्रस्ताव है कि प्रत्येक विषय के लिए ऐसा पद बनाया जाए, जहां अनुभवी शिक्षक विषय प्रमुख की भूमिका निभा सकें।
इन पदों के लिए ₹5,400 के ग्रेड पे के बराबर वेतन संरचना देने की मांग भी सामने आई है।
हालांकि 7वें वेतन आयोग के बाद पुरानी ग्रेड पे व्यवस्था को पे लेवल सिस्टम से बदल दिया गया था, इसलिए भविष्य में इस तरह की किसी मांग को स्वीकार किए जाने की स्थिति में उसे नई पे मैट्रिक्स के अनुरूप ही तय किया जाएगा।
चौथी मांग: वाइस-प्रिंसिपल का वेतन स्तर बढ़े
वाइस-प्रिंसिपल पद के वेतन को लेकर भी कर्मचारी प्रतिनिधियों ने अपनी मांग रखी है।
शिक्षक संगठनों की ओर से वाइस-प्रिंसिपल के वेतन स्तर को अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है। पुरानी व्यवस्था के हिसाब से इसे ₹6,600 ग्रेड पे के बराबर रखने की मांग बताई गई है।
अगर आयोग इस मांग को उचित मानता है तो भविष्य में वाइस-प्रिंसिपल के लिए उच्च पे लेवल की सिफारिश की जा सकती है। हालांकि फिलहाल यह केवल एक मांग है और इसे मंजूर वेतन संशोधन नहीं समझा जाना चाहिए।
पांचवीं मांग: छुट्टियां और CGHS मेडिकल सुविधा बढ़े
शिक्षक संगठनों की मांगों में छुट्टियों और मेडिकल सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
प्रतिनिधियों ने लीव से जुड़े मौजूदा नियमों में सुधार की मांग की है। इसके साथ ही कुछ शिक्षकों को केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना यानी CGHS जैसी मेडिकल सुविधाओं का लाभ दिए जाने का सुझाव भी रखा गया है।
अगर ऐसे प्रस्तावों पर सकारात्मक फैसला होता है तो कर्मचारियों को वेतन के अलावा सेवा शर्तों और स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर पर भी फायदा मिल सकता है।
दिल्ली के बाद दूसरे शहरों में भी बैठकें
आयोग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों और शहरों में कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया चल रही है।
आयोग इससे पहले लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता सहित विभिन्न स्थानों पर बैठकें तय कर चुका है। आने वाले चरणों में चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भी हितधारकों के साथ बैठकों की योजना बनाई गई है।
इन बैठकों का उद्देश्य कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य संबंधित समूहों की मांगों को समझना और उन्हें आयोग की समीक्षा प्रक्रिया में शामिल करना है।
फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर
केंद्रीय कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की है।
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है जिसका उपयोग मौजूदा बेसिक वेतन को नई वेतन संरचना में बदलने के लिए किया जा सकता है। इसका स्तर जितना अधिक होगा, नए बेसिक वेतन में संभावित बढ़ोतरी उतनी ज्यादा हो सकती है।
अलग-अलग रिपोर्ट्स और कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को लेकर कई तरह के अनुमान सामने आते रहे हैं। कहीं 1.83 से 2.46 तक की चर्चा है तो कहीं इससे ज्यादा गुणक की मांग भी की गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक आयोग ने आधिकारिक तौर पर किसी फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं की है। इसलिए किसी भी अनुमान को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
क्या सैलरी में 30 से 34 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है?
8वें वेतन आयोग को लेकर संभावित वेतन वृद्धि के भी कई अनुमान सामने आ रहे हैं। कुछ विश्लेषणों में सैलरी में 30 से 34 प्रतिशत तक प्रभाव की संभावना जताई गई है।
लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह बेसिक पे, महंगाई भत्ता, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों की नई संरचना और सरकार द्वारा स्वीकार की जाने वाली सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
इसलिए अभी किसी तय प्रतिशत को कर्मचारियों की निश्चित सैलरी बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?
सरकार की अधिसूचना के मुताबिक आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। 3 नवंबर 2025 से 18 महीने की अवधि के आधार पर रिपोर्ट की समयसीमा लगभग मई 2027 के आसपास बनती है।
आयोग रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों की समीक्षा करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नई पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर, पेंशन संशोधन और अन्य लाभ किस रूप में लागू किए जाएंगे।
फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग की प्रक्रिया अभी जारी है। रिटायरमेंट उम्र, प्रमोशन, मेडिकल सुविधा, छुट्टियां या फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी मांगों को अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही नई वेतन व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक चेन्नई में बैठक 7-8 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित की गई है, जबकि आयोग पहले लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता जैसे शहरों के लिए भी बैठक नोटिस जारी कर चुका है। (8 CPC)
