8th Pay Commission: सालाना वेतन वृद्धि बढ़ी तो कम फिटमेंट फैक्टर में भी कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

 
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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चा अब केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं रह गई है। कर्मचारी संगठनों ने इस बार वार्षिक वेतन वृद्धि यानी annual increment को भी बड़ा मुद्दा बना दिया है। मांग यह है कि मौजूदा 3 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी को बढ़ाकर 5 से 7 प्रतिशत के बीच किया जाए। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी आने वाले वर्षों में काफी तेजी से बढ़ सकती है, भले ही शुरुआत में लागू होने वाला फिटमेंट फैक्टर उम्मीद से कम क्यों न हो।

यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही बातचीत में अब दो अलग-अलग पहलुओं पर नजर रखी जा रही है। पहला, नई वेतन संरचना तय करते समय कितना फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाएगा और दूसरा, इसके बाद कर्मचारियों को हर साल बेसिक पे में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी मिलेगी।

केवल शुरुआती वेतन बढ़ोतरी पर नहीं टिकी पूरी तस्वीर

फिटमेंट फैक्टर का असर मुख्य रूप से उस समय दिखाई देता है जब पुराने वेतनमान से नई वेतन व्यवस्था में कर्मचारी की बेसिक सैलरी तय की जाती है। अगर फिटमेंट फैक्टर ज्यादा होता है, तो नए वेतनमान में शुरुआती बेसिक पे भी ज्यादा बनती है।

लेकिन नौकरी के अगले 5, 10 या 15 वर्षों में कर्मचारी की आय कितनी बढ़ेगी, इसमें सालाना इंक्रीमेंट का भी बड़ा योगदान होता है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन annual increment की दर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

उच्च वार्षिक इंक्रीमेंट का फायदा हर साल जुड़ता जाता है। यानी एक वर्ष की बढ़ी हुई बेसिक सैलरी अगले साल की वृद्धि का आधार बनती है। इस compounding effect की वजह से लंबे समय में वेतन में बड़ा अंतर पैदा हो सकता है।

5 से 7 प्रतिशत तक इंक्रीमेंट की उठी मांग

केंद्रीय कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने आयोग के सामने मौजूदा सालाना वेतन वृद्धि में बदलाव की मांग रखी है।

नेशनल काउंसिल ऑफ JCM, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स की ओर से करीब 6 प्रतिशत annual increment की मांग सामने आई है।

ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने इससे भी आगे बढ़कर सालाना 7 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।

वहीं इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन की ओर से 5 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट के साथ ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है।

हालांकि, इन मांगों को अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। आयोग विभिन्न पक्षों की राय सुन रहा है और अंतिम सिफारिशें बाद में सामने आएंगी।

₹30,000 की बेसिक पे से समझें संभावित असर

मान लें कि किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹30,000 है। यदि नई वेतन व्यवस्था में 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए और इसके बाद 3 प्रतिशत का सालाना इंक्रीमेंट मिलता रहे, तो उदाहरण के तौर पर पहले साल बेसिक पे करीब ₹66,435 तक पहुंच सकती है।

इसी गणना में पांचवें वर्ष तक बेसिक सैलरी लगभग ₹74,773 और दसवें वर्ष तक करीब ₹86,683 तक पहुंचने का अनुमान बनता है।

यह उदाहरण दिखाता है कि शुरुआती फिटमेंट फैक्टर के बाद भी सालाना इंक्रीमेंट कर्मचारी की लंबी अवधि की आय को लगातार प्रभावित करता रहता है।

ज्यादा इंक्रीमेंट से कैसे बदल सकती है तस्वीर?

अगर ₹30,000 की बेसिक सैलरी पर केवल वार्षिक वृद्धि का प्रभाव समझें, तो 5 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी के साथ 10 वर्षों में बेसिक पे लगभग ₹48,867 तक पहुंच सकती है।

अगर यही सालाना वृद्धि 7 प्रतिशत हो, तो 10 वर्षों बाद रकम करीब ₹59,015 हो सकती है।

वहीं 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के उदाहरण में बेसिक सैलरी लगभग ₹77,812 तक पहुंच सकती है।

यानी increment rate में कुछ प्रतिशत का अंतर शुरुआती वर्ष में छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इसका प्रभाव काफी बड़ा हो जाता है।

₹35,000 बेसिक वाले कर्मचारियों के लिए क्या संकेत?

अगर किसी कर्मचारी की वर्तमान बेसिक पे ₹35,000 है और 2.15 का फिटमेंट फैक्टर मानकर आगे 3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि जोड़ी जाए, तो 10वें साल तक बेसिक वेतन लगभग ₹1,01,130 तक पहुंच सकता है।

दूसरी तरफ, यदि फिटमेंट फैक्टर को अलग रखकर केवल 10 प्रतिशत annual increment का hypothetical calculation किया जाए, तो 10 वर्षों में यही बेसिक सैलरी लगभग ₹90,781 हो सकती है।

इससे यह समझ आता है कि वेतन बढ़ोतरी का अंतिम परिणाम केवल एक factor पर निर्भर नहीं करता।

₹40,000 बेसिक पे पर कितना अंतर बन सकता है?

₹40,000 की मौजूदा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी के मामले में भी तस्वीर लगभग यही है।

अगर 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने के बाद हर साल 3 प्रतिशत वेतन वृद्धि मानी जाए, तो दसवें साल तक बेसिक पे लगभग ₹1,15,577 तक जा सकती है।

वहीं बिना fitment adjustment के केवल 10 प्रतिशत annual increase का उदाहरण लें, तो दस साल बाद बेसिक पे करीब ₹1,03,750 बन सकती है।

ये आंकड़े केवल समझाने के लिए हैं और इन्हें अंतिम वेतन अनुमान नहीं माना जाना चाहिए।

आयोग की बैठकों में किन मुद्दों पर हो रही चर्चा?

8वें वेतन आयोग की परामर्श प्रक्रिया अलग-अलग शहरों में चल रही है। 7 सितंबर से चेन्नई में दो दिवसीय बैठक शुरू हुई है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

इनमें वेतन संरचना, पेंशन, सेवा शर्तें और कर्मचारियों की अन्य मांगें शामिल हैं।

इसके बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में भी बैठक प्रस्तावित है। इन बैठकों के जरिए आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव जुटा रहा है।

कम फिटमेंट फैक्टर का मतलब कम फायदा जरूरी नहीं

कर्मचारियों के बीच अक्सर सबसे ज्यादा चर्चा fitment factor को लेकर होती है, क्योंकि नई सैलरी तय करने में इसका सीधा असर दिखाई देता है। लेकिन अगर आयोग annual increment को मौजूदा स्तर से बढ़ाता है, तो लंबे समय में कर्मचारियों को इसका फायदा कई वर्षों तक मिल सकता है।

यही वजह है कि कर्मचारी संगठन केवल शुरुआती वेतन संशोधन पर जोर देने के बजाय भविष्य की वेतन वृद्धि को भी मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

अंतिम फैसला आने तक अनुमान ही मानें सभी गणनाएं

8वें वेतन आयोग को लेकर कई तरह के अनुमान और संभावित गणनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन अभी तक न तो अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय हुआ है और न ही नई annual increment rate पर कोई अंतिम निर्णय हुआ है।

असल वेतन वृद्धि आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार द्वारा उन पर लिए जाने वाले फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर वार्षिक इंक्रीमेंट को 5 से 7 प्रतिशत के बीच बढ़ाने की मांग स्वीकार होती है, तो कर्मचारियों को लंबी अवधि में बड़ा फायदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में अपेक्षाकृत कम फिटमेंट फैक्टर के बावजूद बेसिक सैलरी समय के साथ तेज रफ्तार से बढ़ सकती है।

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