8th Pay Commission: पे-लेवल मर्जर से 6% सालाना इंक्रीमेंट तक, जानें कर्मचारियों की बड़ी मांगें
8th Pay Commission Update: आठवें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन NC-JCM ने वेतन संरचना में कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इनमें कुछ पे-लेवल को आपस में मिलाने, न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने और वार्षिक इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने जैसी मांगें शामिल हैं। हालांकि, इन पर अभी कोई सरकारी फैसला नहीं हुआ है।
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है। आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों, विभागों और राज्यों से सुझाव जुटाने की प्रक्रिया में है। इसी दौरान नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन आयोग के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं, जिनका उद्देश्य वेतन संरचना को सरल बनाना और कर्मचारियों के बीच वेतन संबंधी असमानताओं को कम करना बताया गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये फिलहाल कर्मचारी संगठन की मांगें हैं, इन्हें सरकार या 8वें वेतन आयोग ने अभी मंजूरी नहीं दी है।
पे-लेवल मर्जर की क्या है मांग?
वर्तमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 18 स्तरों वाला पे-मैट्रिक्स लागू है। NC-JCM का कहना है कि कुछ स्तरों के बीच वेतन का अंतर बहुत कम है, जबकि काम की प्रकृति लगभग समान रहती है। इसलिए कई पे-लेवल को आपस में मिलाने का प्रस्ताव दिया गया है।
संगठन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
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लेवल-2 और लेवल-3 को एक पे-लेवल में शामिल किया जाए।
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लेवल-4 और लेवल-5 का विलय किया जाए।
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लेवल-7 और लेवल-8 को एकीकृत किया जाए।
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लेवल-9 और लेवल-10 को भी एक साथ लाया जाए।
कर्मचारी संगठन ने क्या दिया तर्क?
NC-JCM का कहना है कि अलग-अलग पे-लेवल होने के बावजूद कई कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और वेतन में अंतर बहुत सीमित होता है। इससे कर्मचारियों में पद और वेतन को लेकर असंतोष की स्थिति बनती है। यदि समान प्रकृति वाले पदों को एक स्तर पर लाया जाता है, तो वेतन संरचना अधिक सरल और संतुलित हो सकती है।
लेवल-5 कर्मचारियों के लिए विशेष प्रस्ताव
संगठन ने लेवल-5 में कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक अतिरिक्त मांग भी रखी है। इसके अनुसार, उन्हें वन-टाइम अपग्रेड देकर सीधे लेवल-6 में शामिल किया जाए।
NC-JCM का कहना है कि रेलवे, डाक विभाग, रक्षा प्रतिष्ठानों और केंद्रीय सचिवालय के कई ग्रुप-सी कर्मचारी लंबे समय से इसी स्तर पर कार्यरत हैं। ऐसे में अपग्रेड मिलने से उनके करियर में बेहतर प्रगति का अवसर मिल सकता है।
NC-JCM की अन्य प्रमुख मांगें
पे-लेवल मर्जर के अलावा संगठन ने वेतन ढांचे में कई अन्य बदलावों का भी सुझाव दिया है—
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न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 निर्धारित की जाए।
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वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) 3% से बढ़ाकर 6% की जाए।
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लेवल-13 तक एक समान और सरल पे-मैट्रिक्स तैयार किया जाए।
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महंगाई से जुड़ा वेतन मॉडल लागू किया जाए।
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पेंशन व्यवस्था में भी संरचनात्मक सुधार किए जाएं।
8वें वेतन आयोग का काम कहां तक पहुंचा?
आठवां वेतन आयोग विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और राज्यों से सुझाव व आंकड़े एकत्र कर रहा है। आयोग का उद्देश्य वेतन, भत्तों और पेंशन व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करना है।
इसके लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कर्मचारी संगठनों एवं विभागीय प्रतिनिधियों से भी लगातार बातचीत की जा रही है।
क्या ये सभी मांगें लागू हो जाएंगी?
फिलहाल इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। कर्मचारी संगठनों द्वारा रखे गए सभी सुझावों पर आयोग विचार करेगा, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। इसलिए अभी इन प्रस्तावों को लागू मानना उचित नहीं होगा।
कब आ सकती हैं अंतिम सिफारिशें?
8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए निर्धारित समय दिया गया है। रिपोर्ट जमा होने के बाद केंद्र सरकार उसकी समीक्षा करेगी और उसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। अंतिम सिफारिशें आने और उन्हें लागू करने में कुछ समय लग सकता है।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की ओर से कई अहम सुझाव रखे गए हैं, जिनमें पे-लेवल मर्जर, न्यूनतम बेसिक वेतन बढ़ाने और वार्षिक इंक्रीमेंट दोगुना करने जैसी मांगें प्रमुख हैं। हालांकि, ये अभी केवल प्रस्ताव हैं। कर्मचारियों को किसी भी बदलाव के लिए आयोग की अंतिम सिफारिशों और केंद्र सरकार के आधिकारिक निर्णय का इंतजार करना होगा।
