देवशयनी एकादशी 2026 कब है? 24 या 25 जुलाई, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व
देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म की प्रमुख एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इस अवधि में कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है और पूजा, व्रत तथा आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बढ़ जाता है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल है कि देवशयनी एकादशी 24 जुलाई को मनाई जाएगी या 25 जुलाई 2026 को? पंचांग के अनुसार तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
24 या 25 जुलाई, कब है देवशयनी एकादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 9:14 बजे प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:36 बजे समाप्त होगी।
धार्मिक परंपराओं में अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) के आधार पर मनाए जाते हैं। इसी नियम के अनुसार वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत और पर्व 25 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगा।
देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जो देवउठनी एकादशी तक चलता है।
मान्यता है कि इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य कई मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। वहीं पूजा-पाठ, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा का शुभ समय
देवशयनी एकादशी पर प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का चयन किया जा सकता है।
श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप भी कई लोग करते हैं।
देवशयनी एकादशी की पारंपरिक पूजा विधि
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प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
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स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।
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पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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दीपक जलाकर फूल, चंदन, अक्षत, तुलसी दल और भोग अर्पित करें।
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विष्णु मंत्रों या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
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दिनभर यथाशक्ति व्रत रखें और अगले दिन द्वादशी पर नियमपूर्वक पारण करें।
इस दिन दान का भी है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी पर अन्न, वस्त्र, छाता, जलपात्र, फल और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
चातुर्मास क्यों माना जाता है विशेष?
देवशयनी एकादशी से आरंभ होने वाला चातुर्मास लगभग चार महीनों तक चलता है। इस दौरान कई साधु-संत एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं। श्रद्धालु भी इस अवधि में संयम, सात्विक भोजन, भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों पर अधिक ध्यान देते हैं।
निष्कर्ष
वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी, क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी। यह पर्व भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा के समय एवं विधि में कुछ अंतर हो सकता है। ऐसे में स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित की सलाह का पालन करना उचित रहेगा।
