Sawan Somwar 2026: शिव पूजा में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, जलाभिषेक से परिक्रमा तक जानें सही तरीका

 
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Sawan Second Somwar 2026: सावन का सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। 10 अगस्त 2026 को उत्तर भारत में सावन का दूसरा सोमवार पड़ रहा है और इसी दिन सोम प्रदोष का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ सकती है। कई भक्त जल, दूध, बेलपत्र और फूल लेकर मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन पूजा के दौरान जल्दबाजी या जानकारी की कमी में कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिन्हें धार्मिक परंपराओं में उचित नहीं माना जाता।

शिव पूजा का मुख्य आधार श्रद्धा, संयम और स्वच्छता है। इसलिए सिर्फ ज्यादा सामग्री चढ़ाना या लंबे समय तक अभिषेक करना ही पूजा का उद्देश्य नहीं है। मंदिर की परंपरा, वहां की व्यवस्था और दूसरे श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

आइए जानते हैं सावन सोमवार पर शिव पूजा करते समय किन 7 आम गलतियों से बचना चाहिए।

1. बहुत तेज धार से जल चढ़ाना

शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय कई लोग ऊंचाई से तेज धार में पानी डालते हैं। धार्मिक परंपरा में इसकी कोई आवश्यकता नहीं मानी जाती।

शिवलिंग पर साफ जल धीरे और शांत धार में अर्पित करना बेहतर माना जाता है। जल चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप भी किया जा सकता है।

भीड़ वाले मंदिर में लंबे समय तक जल चढ़ाकर रास्ता रोकने से बचें। कम मात्रा में जल और श्रद्धा के साथ किया गया अभिषेक भी पर्याप्त माना जाता है।

2. दूध चढ़ाने के बाद साफ पानी न डालना

सावन में कई भक्त दूध, दही, शहद या दूसरी सामग्री से अभिषेक करते हैं। लेकिन इन पदार्थों को चढ़ाने के बाद साफ जल से शिवलिंग और जलहरी को धोना जरूरी माना जाता है।

दूध या मीठी सामग्री अधिक देर तक जमा रहने पर दुर्गंध, फिसलन और कीटों की समस्या हो सकती है।

इसलिए मंदिर प्रशासन की अनुमति से ही ऐसी सामग्री का उपयोग करें। अगर मंदिर में केवल जलाभिषेक की अनुमति है, तो उसी नियम का पालन करना बेहतर है।

3. खराब या गंदा बेलपत्र चढ़ाना

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। आमतौर पर तीन जुड़ी पत्तियों वाला साफ और ताजा बेलपत्र शुभ माना जाता है।

सड़ा, अत्यधिक टूटा, गंदा या कीड़ों से खराब बेलपत्र चढ़ाने से बचना चाहिए। बेलपत्र को साफ पानी से धोकर अर्पित किया जा सकता है।

अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पूजा अधूरी नहीं मानी जाती। केवल जल और मंत्र जप से भी भगवान शिव की आराधना की जा सकती है।

4. हर फूल या पत्ती शिवलिंग पर चढ़ा देना

सभी फूल और पत्तियां हर देवता की पूजा में एक समान नहीं चढ़ाई जातीं। शिव पूजा में बेलपत्र, आक, धतूरा, शमी और कुछ सफेद फूलों का विशेष महत्व माना जाता है।

वहीं तुलसी और केतकी को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और ग्रंथों में मतभेद देखने को मिलते हैं।

इसलिए इंटरनेट पर मिली किसी सूची को अंतिम नियम मानने के बजाय संबंधित मंदिर की परंपरा या वहां के पुजारी से जानकारी लेना बेहतर है।

5. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करना

शिव मंदिर में परिक्रमा को लेकर भी विशेष परंपरा प्रचलित है। सामान्य मान्यता के अनुसार शिवलिंग की जलहरी यानी जिस रास्ते से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसे पार नहीं किया जाता।

इसी वजह से कई मंदिरों में भक्त जलहरी तक जाकर वापस लौटते हैं और आधी परिक्रमा करते हैं।

हालांकि हर मंदिर की संरचना अलग हो सकती है। कुछ स्थानों पर गर्भगृह के बाहर पूरे मंदिर परिसर की परिक्रमा की जाती है। इसलिए मंदिर में लगे निर्देशों और स्थानीय परंपरा का पालन करें।

6. नंदी और शिवलिंग के बीच खड़े होना

अधिकांश शिव मंदिरों में नंदी की प्रतिमा शिवलिंग के ठीक सामने होती है। धार्मिक मान्यता में नंदी को भगवान शिव का वाहन और परम भक्त माना जाता है।

इसी कारण कई परंपराओं में नंदी और शिवलिंग के बीच से गुजरना या वहां लंबे समय तक खड़े रहना उचित नहीं माना जाता।

पहले नंदी को प्रणाम करें और फिर एक ओर से शिवलिंग के दर्शन करें। भीड़ के समय फोटो या वीडियो बनाने के लिए रास्ता रोकने से बचना भी जरूरी है।

7. पूजा के बाद प्लास्टिक और कचरा छोड़ना

पूजा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में प्लास्टिक की बोतलें, दूध की थैलियां, फूलों के पैकेट और अगरबत्ती के रैपर छोड़ देना एक आम समस्या है।

धार्मिक दृष्टि से भी स्वच्छता को पूजा का हिस्सा माना जाता है। इसलिए फूल और जैविक सामग्री निर्धारित पात्र में डालें, जबकि प्लास्टिक और दूसरी गैर-जैविक सामग्री अपने साथ वापस ले जाएं।

मंदिर प्रशासन ने किसी सामग्री पर रोक लगाई है तो उसे अंदर ले जाने से बचें।

जलहरी के पानी को पैरों से बचाएं

शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल जलहरी के रास्ते बाहर आता है। कई श्रद्धालु इसे पवित्र मानते हैं और इसे लांघने या उस पर पैर रखने से बचते हैं।

भीड़ के दौरान जलहरी का रास्ता दिखाई नहीं दे तो धीरे चलें और बच्चों को भी सावधानी से साथ रखें।

10 अगस्त को शिव पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। सबसे पहले नंदी को प्रणाम करें। इसके बाद शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें।

बेलपत्र उपलब्ध हो तो साफ करके चढ़ाएं और सफेद फूल अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।

इसके बाद भगवान शिव के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश का ध्यान करें। अपनी प्रार्थना में केवल धन या सफलता ही नहीं, बल्कि शांति, संयम और सही निर्णय लेने की शक्ति भी मांग सकते हैं।

सोम प्रदोष का व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम के प्रदोष काल में पूजा कर सकते हैं। पूजा का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।

क्या केवल जल से शिव पूजा हो सकती है?

हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा के लिए महंगी सामग्री जरूरी नहीं है।

साफ जल, श्रद्धा और पंचाक्षर मंत्र का जप भी पूजा का पर्याप्त माध्यम माना जाता है। अगर बेलपत्र या दूसरी सामग्री उपलब्ध न हो तो चिंता करने की जरूरत नहीं है।

पूजा का भाव सामग्री की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।

पूजा में गलती हो जाए तो क्या करें?

अनजाने में पूजा के दौरान कोई छोटी गलती हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, यानी वे सरल भाव से प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं।

ऐसी स्थिति में मन से क्षमा मांगें और आगे सही विधि अपनाने की कोशिश करें।

पूजा का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि मन में शांति और व्यवहार में संयम लाना है। इस सावन सोमवार पर सिर्फ जल और बेलपत्र अर्पित करने के साथ किसी एक बुरी आदत को छोड़ने का संकल्प भी पूजा का meaningful हिस्सा बन सकता है।

FAQ

10 अगस्त 2026 को कौन-सा सावन सोमवार है?
उत्तर भारत में 10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार माना जा रहा है।

शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाना चाहिए?
साफ जल को धीरे और शांत धार में अर्पित करना बेहतर माना जाता है।

क्या शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करनी चाहिए?
प्रचलित परंपरा में जलहरी को पार किए बिना आधी परिक्रमा की जाती है, हालांकि मंदिर के नियम अलग हो सकते हैं।

कैसा बेलपत्र चढ़ाना चाहिए?
साफ, ताजा और सामान्यतः तीन जुड़ी पत्तियों वाला बेलपत्र शुभ माना जाता है।

अगर पूजा में गलती हो जाए तो क्या करें?
भयभीत होने के बजाय भगवान शिव से क्षमा मांगें और आगे मंदिर की परंपरा के अनुसार पूजा करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में पूजा की विधि अलग हो सकती है। किसी विशेष धार्मिक नियम को अपनाने से पहले स्थानीय मंदिर या जानकार पुरोहित से जानकारी लेना बेहतर है।

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