Pitru Paksha- पितृ पक्ष में नए कपड़े, वाहन और गहनें क्यों नहीं खरीदतें, आइए जानें
दोस्तो हिंदू धर्म पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व हैं, इस दौरान लोग पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजनों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। साथ ही जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने की भी परंपरा है।लेकिन पितृ पक्ष के दौरान व्यक्तिगत उपयोग के लिए नई और महंगी वस्तुएं खरीदने से भी परहेज किया जाता है। आइए जानते हैं इसका कारण

पितृ पक्ष में नए कपड़े और आभूषण खरीदने की मान्यता
कुछ धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ पक्ष में अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए नए कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण और फैशन से जुड़ी वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए।
हालांकि, श्राद्ध कर्म, दान-पुण्य या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता के लिए खरीदी जाने वाली वस्तुओं को इस मान्यता से अलग माना जाता है।
इसी तरह कुछ परंपराओं में इस दौरान नई कार, बाइक, मकान या जमीन जैसी बड़ी खरीदारी को भी टालने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे धार्मिक विचार यह है कि पितृ पक्ष को भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय पूर्वजों के स्मरण और धार्मिक कर्मों के लिए समर्पित समय माना जाता है।
नई झाड़ू खरीदने को लेकर क्या मान्यता है?
हिंदू परंपराओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। इसी वजह से कुछ मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदने से बचना चाहिए।
हालांकि, यह भी एक पारंपरिक धार्मिक मान्यता है और अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रों में इसके पालन के तरीके अलग हो सकते हैं।
नमक और सरसों के तेल से जुड़ी मान्यताएं
पितृ पक्ष के दौरान कुछ परंपराओं में नया नमक खरीदने, किसी से नमक उधार लेने या दूसरे को नमक उधार देने से बचने की बात कही जाती है।
इसी तरह कुछ धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि में सरसों का तेल खरीदकर घर लाने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।
इन मान्यताओं का पालन करना व्यक्तिगत आस्था और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।

टीवी, फ्रिज और फर्नीचर खरीदने को लेकर क्या कहा जाता है?
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड, फर्नीचर और घर की सजावट से जुड़ी नई वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए।
मान्यता के पीछे विचार यह है कि पितृ पक्ष सादगी, संयम और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का समय है। इसलिए इस दौरान नए भौतिक सुख-साधनों की खरीदारी के बजाय श्राद्ध कर्म, तर्पण और दान-पुण्य पर ध्यान देने की परंपरा है।
2026 में कब से शुरू होगा पितृ पक्ष?
साल 2026 में पितृ पक्ष की तिथियों को लेकर कुछ जगहों पर भ्रम देखने को मिल रहा है। उपलब्ध पंचांग परंपरा के अनुसार:
26 सितंबर 2026: पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026: प्रतिपदा श्राद्ध से मुख्य पितृ पक्ष की शुरुआत
10 अक्टूबर 2026: सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन
श्राद्ध की तिथि सामान्यतः दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु तिथि से संबंधित हिंदू चंद्र तिथि के आधार पर निर्धारित की जाती है।
मृत्यु तिथि पता न हो तो किस दिन करें श्राद्ध?
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या को उनका श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है।
हालांकि, श्राद्ध की सही तिथि और विधि निर्धारित करने के लिए अपने स्थानीय पंचांग, परिवार की परंपरा और संबंधित धार्मिक आचार्य की सलाह लेना उचित माना जाता है।
