Pitru Paksha 2026- श्राद्ध करते समय भूलकर भी ना करें ये काम, वरना रूठ जाएंगे पितृ
दोस्तो हिंदू धर्म में पितृ पक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दिनों में पूर्वजों का स्मरण और उनके निमित्त किए गए कर्म विशेष महत्व रखते हैं। इसी वजह से इस अवधि में जीवनशैली को सादा और संयमित रखने तथा कुछ कार्यों से दूरी बनाने की परंपरा है। आइए जानते हैं इस दौरान कौनसी गलतियां नहीं करना चाहिए-

1. शुभ और मांगलिक कार्यों से बचें
पितृ पक्ष को आमतौर पर उत्सव या मांगलिक कार्यक्रमों के बजाय पूर्वजों के स्मरण का समय माना जाता है। इसलिए इस दौरान कई परिवार विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक समारोह आयोजित करने से बचते हैं।
इसी तरह नए कारोबार की शुरुआत या किसी बड़े शुभ कार्य को भी पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद करने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है।
2. बड़ी खरीदारी को टालने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में जीवन को सादगी के साथ बिताने पर जोर दिया जाता है। इसलिए कुछ लोग इस दौरान नया वाहन, मकान, जमीन या अन्य महंगी वस्तुएं खरीदने से परहेज करते हैं।
3. नए कपड़े खरीदने से बचें
पितृ पक्ष के दौरान सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है। इसी कारण कुछ परंपराओं में नए कपड़े खरीदने या पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं, जरूरतमंदों, गरीबों या ब्राह्मणों को कपड़े दान करना पुण्यकारी कार्य माना जाता है। इसलिए इस अवधि में कपड़ों का दान करने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।

4. मांसाहार और शराब से करें परहेज
श्राद्ध और तर्पण के दौरान खान-पान की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान हल्का, सात्त्विक और शुद्ध भोजन करने तथा संयमित दिनचर्या अपनाने की परंपरा है। पूर्वजों के लिए बनाए जाने वाले भोजन में भी सात्त्विकता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
5. घर में झगड़ा और विवाद न करें
पितृ पक्ष के दौरान घर का वातावरण शांत और श्रद्धापूर्ण रखने पर जोर दिया जाता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को गुस्सा, विवाद, लड़ाई-झगड़ा और अनावश्यक बहस से बचने की सलाह दी जाती है। श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कार्य शांत मन और श्रद्धा के साथ किए जाने चाहिए। इसलिए इस अवधि में परिवार के बीच प्रेम, सम्मान और सौहार्द बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
