Navratri Special 2026: घटस्थापना पर जौ क्यो बोए जाते हैं, आइए जानें
दोस्तो 11 अक्टूबर से देश मे नवरात्रि की स्थापना हो रही हैं, इस दौरान भक्त माता रानी को खुश करने के लिए विभिन्न पूजा करते हैं, ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा सदियों पुरानी है। घरों और मंदिरों में मिट्टी से भरे पात्र में जौ के बीज बोए जाते हैं और नौ दिनों तक उनकी बढ़ती हरियाली को देखा जाता है। आइए जानते हैं इसका कारण

मिट्टी के पात्र में ही क्यों बोए जाते हैं जौ?
घटस्थापना के समय चौड़े मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ के बीज बोए जाते हैं। धार्मिक परंपरा में मिट्टी को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना गया है। इसी मिट्टी से बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप लेते हैं, इसलिए जौ का उगना प्रकृति और जीवन के विकास से जोड़ा जाता है।
इसके बाद पात्र के बीच में कलश स्थापित किया जाता है। मिट्टी, बीज, जल और कलश का यह संयोजन प्रकृति, जीवन और देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
जौ को माना जाता है जीवन और विकास का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जौ को सृष्टि के प्रारंभिक अनाजों में से एक माना गया है। इसी कारण नवरात्रि में इसके बीज बोने की परंपरा को जीवन के विकास और सकारात्मक वृद्धि से जोड़ा जाता है।
नौ दिनों में जौ के अंकुर धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इनकी हरियाली घर में सुख, शांति, समृद्धि और उन्नति की कामना का प्रतीक होती है।
अनाज और समृद्धि से जुड़ी है यह परंपरा
प्राचीन समय से ही जौ महत्वपूर्ण अनाजों में शामिल रहा है। खेती और फसल भारतीय जीवन एवं संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। ऐसे में घटस्थापना के दौरान जौ बोने की परंपरा को अच्छी फसल, पर्याप्त अन्न और समृद्धि की कामना से भी जोड़ा जाता है।
यह परंपरा देवी की आराधना के साथ-साथ प्रकृति, कृषि और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी मानी जाती है।

घटस्थापना में सप्तधान्य का भी उल्लेख
कुछ पारंपरिक विधियों में घटस्थापना के दौरान सप्तधान्य, यानी सात प्रकार के अनाजों का उल्लेख मिलता है। इनमें सामान्यतः जौ, तिल, धान, मूंग, कंगनी, चना और गेहूं शामिल माने जाते हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि घटस्थापना में अनाजों का प्रयोग केवल एक धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं है। इसके पीछे प्रकृति, कृषि, अन्न, जीवन और समृद्धि से जुड़ी सांस्कृतिक भावना भी दिखाई देती है।
नौ दिनों तक जौ के अंकुरों पर रहती है नजर
नवरात्रि के दौरान जौ के पौधों की वृद्धि को विशेष रूप से देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इनके अच्छे और तेजी से बढ़ने को शुभ माना जाता है। हालांकि, इसे वैज्ञानिक भविष्यवाणी के बजाय आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता के रूप में देखना चाहिए।
