एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने सत्ता में आने का मौका दिया, उन्हें तीसरी बार दिल्ली के चीफ मिनिस्टर की कुर्सी मिल गई है, लेकिन आपको पता है इस आम आदमी के खास बनने का पूरा सफर कैसे तैय किया है, आपको बात दे इनकम टैक्स अफसर की नौकरी से इस्तीफा देकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने वाले अरविंद केजरीवाल कैसे बन गए दिल्ली के सीएम आज जानते है।


अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था, उनके पिता का नाम गोविंद और माता का नाम गीता है। केजरीवाल ने हरियाणा के हिसार स्थित कैंपस स्कूल और इसके बाद सोनीपत स्थित क्रिस्चियन मिशनरी स्कूल से अपनी स्कूली श‍िक्षा पूरी की। पढ़ाई में भी अच्छे होने के कारण पहली ही बार में उन्हें आईआईटी खड़गपुर में दाखिला मिल गया. यहां से केजरीवाल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।


मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सन् 1989 में टाटा स्टील से अपना करियर शुरू किया, पहली पोस्टिंग जमशेदपुर हुई। तीन साल यहां काम करने के बाद सन् 1992 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और सिविल सर्विस की तैयारी करने लगे।

अरविंद केजरीवाल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) क्लीयर करके आईआरएस अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली, आईआरएस की ट्रेनिंग के दौरान उनकी मुलाकात सुनीता से हुई, जिनसे प्रेम के बाद उन्होंने शादी की।

यूपीएससी निकालने के बाद उनका इनकम टैक्स के डिप्टी कमिश्नर का पद मिला, लेकिन बाद में उन्‍होंने यहां भी नौकरी छोड़ दी और सामाजिक कार्यों में लग गए, IRS की नौकरी छोड़कर समाजसेवा के लिए सड़कों पर आए अरविंद केजरीवाल को शुरुआत में अन्ना हजारे जैसे बड़े समाजसेवियों का साथ मिला।


केजरीवाल ने 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी की नींव रखी और राजनीति में आने का ऐलान किया, पहली बार साल 2013 में आम आदमी पार्टी कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्ष‍ित के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी, इनके प्रचार का तरीका खर्चीली रैलियों से अलग था, मोहल्ला सभाओं के जरिये प्रचार और लोगों तक पहुंच बनाई और मानो कोई चमत्कार हो गया। दिल्ली की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया. तब से आम आदमी पार्टी की जीत का सिलसिला जारी है. अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने तीसरी बार मुख्यमंत्री के तौर पर सिर आंखों पर बैठाया है।

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