राजस्थान से एक नई बड़ी खबर सामने आ रही है. गहलोत और पायलट के बीच पिछले कई दिनों से चल रहा झगड़ा अब खत्म होता नजर आ रहा है. कांग्रेस आलाकमान के दबाव के बाद अब गहलोत सरकार सत्ता और संगठन में बैठे सचिन पायलट और उनकी टीम को कड़ी जिम्मेदारी देने लगी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सचिन पायलट को AICC में महासचिव का पद देने पर सहमति बनी है. इसकी शुरुआत विधानसभा चुनाव समितियों में पायलट टीम की मदद से हुई।

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दरअसल सचिन पायलट को विधानसभा की आचार समिति में शामिल किया गया था. पायलट टीम लीडर दीपेंद्र सिंह शेखावत को एथिक्स कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। वहीं पायलट दल के हटाए गए मंत्री रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह को सदस्य बनाया गया है। साथ ही पायलट गुट के नाराज विधायक हेमाराम चौधरी को भी विधानसभा की राज्य उपक्रम समिति का अध्यक्ष बनाया गया.

यह स्पष्ट है कि हेमाराम का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था और उन्हें पार्टी ने मना लिया था। ऐसे में पायलट टीम के विधायक इंद्रराज गुर्जर, वेद प्रकाश सोलंकी, मुरारी मीणा और हरीश मीणा को विधानसभा की समितियों में शामिल कर पायलट टीम की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य स्तर पर कैबिनेट विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां हो सकती हैं.

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